मजबूत होगा अपना भारत
राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए पूरे भारत की आसभरी निगाहें मोदी की ओर लगी हैं। अधिकांश लोग बिन मांगे मोदी को कार्यों की प्राथमिकता का परामर्श दे रहे हैं। मैं भी उन्हीं लोगों की सूची में शामिल हो रहा हूं।
भूमिका: देश-विदेश के जानेमाने राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक, समाजशास्त्री तथा अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ मानते रहे हैं कि 1-प्राकृतिक संसाधनों भरपूर एवं वृहद संभावनाओं वाला देश है भारत, 2- भारत के लोगों में अपार योग्यता और क्षमता है।
अगर उक्त कथन सही हैं और उन्हें जमीन पर चरितार्थ करना है तो हमारा परामर्श होगा कि;
(1) जनता की गाढ़ी कमाई पर ऐश करने वाले जहरीले लोगों पर पूरी कठोरता से प्रतिबंध लगाओ। महलों, मठों और सरायों में सुख भोग करने वाले हिन्दू-मुसलमानों के स्वयंभू ठेकेदारों को नष्ट करो। जमाना नाराज होता है तो होने दो। कोई जाति या सम्प्रदाय के लोग नाराज होते हैं तो फिक्र मत करो। क्योंकि उक्त विषधरों की प्रजातियां, शताब्दी से भारत को उसकी वास्तविक शक्ति और पूर्ण क्षमता के साथ खड़ा नहीं होने दे रही हैं।
(2) जाति, सम्प्रदाय, भाषा और क्षेत्र की खेती बंद होते ही, नागफनी की खेती करने वाले या तो सुधरकर साकारात्मक विचारों के खेतीहर हो जाएंगे या अपने आप नष्ट हो जायेंगे।
ऐसा होते ही जनता, जाति, धर्म और सम्प्रदाय के घुटनभरे बाड़े से बाहर निकलकर अपनी वास्तविकता को जान सकेगी। हिन्दूस्तानी के रूप में अपनी सूरत को पहचान सकेगी। सब परस्पर मिलजुलकर अपनी पूरी क्षमता, योग्यता और कौशल के साथ जो कार्य करेंगे, उस नई ऊर्जा और नये विश्वास से बनेगा ‘एक नया भारत’, एक खुशहाल भारत, एक शक्तिशाली और समृद्ध भारत।
गुरूद्वारे में होगी देव की वाणी, मस्जिद में अजान, मंदिरों में तरंगित होगा रामायण का गान।
‘‘ न हिन्दू गद्दार है, न सिख-मुसलमां है गद्दार बनाया है देश को सबने, सब हैं वफादार।।
पढ़े-लिखे जाहिल हों जैसे, परस्पर नहीं एतबार,
बात-बात पर लड़ने-मरने को रहते हैं तैयार।।
हाथ में त्रिशूल हिन्दू के,
चाकू मुसलमां और सिख कटार
बहकावे में बन जाते हैं देश के गद्दार।।’’
राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए पूरे भारत की आसभरी निगाहें मोदी की ओर लगी हैं। अधिकांश लोग बिन मांगे मोदी को कार्यों की प्राथमिकता का परामर्श दे रहे हैं। मैं भी उन्हीं लोगों की सूची में शामिल हो रहा हूं।
भूमिका: देश-विदेश के जानेमाने राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक, समाजशास्त्री तथा अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ मानते रहे हैं कि 1-प्राकृतिक संसाधनों भरपूर एवं वृहद संभावनाओं वाला देश है भारत, 2- भारत के लोगों में अपार योग्यता और क्षमता है।
अगर उक्त कथन सही हैं और उन्हें जमीन पर चरितार्थ करना है तो हमारा परामर्श होगा कि;
(1) जनता की गाढ़ी कमाई पर ऐश करने वाले जहरीले लोगों पर पूरी कठोरता से प्रतिबंध लगाओ। महलों, मठों और सरायों में सुख भोग करने वाले हिन्दू-मुसलमानों के स्वयंभू ठेकेदारों को नष्ट करो। जमाना नाराज होता है तो होने दो। कोई जाति या सम्प्रदाय के लोग नाराज होते हैं तो फिक्र मत करो। क्योंकि उक्त विषधरों की प्रजातियां, शताब्दी से भारत को उसकी वास्तविक शक्ति और पूर्ण क्षमता के साथ खड़ा नहीं होने दे रही हैं।
(2) जाति, सम्प्रदाय, भाषा और क्षेत्र की खेती बंद होते ही, नागफनी की खेती करने वाले या तो सुधरकर साकारात्मक विचारों के खेतीहर हो जाएंगे या अपने आप नष्ट हो जायेंगे।
ऐसा होते ही जनता, जाति, धर्म और सम्प्रदाय के घुटनभरे बाड़े से बाहर निकलकर अपनी वास्तविकता को जान सकेगी। हिन्दूस्तानी के रूप में अपनी सूरत को पहचान सकेगी। सब परस्पर मिलजुलकर अपनी पूरी क्षमता, योग्यता और कौशल के साथ जो कार्य करेंगे, उस नई ऊर्जा और नये विश्वास से बनेगा ‘एक नया भारत’, एक खुशहाल भारत, एक शक्तिशाली और समृद्ध भारत।
गुरूद्वारे में होगी देव की वाणी, मस्जिद में अजान, मंदिरों में तरंगित होगा रामायण का गान।
‘‘ न हिन्दू गद्दार है, न सिख-मुसलमां है गद्दार बनाया है देश को सबने, सब हैं वफादार।।
पढ़े-लिखे जाहिल हों जैसे, परस्पर नहीं एतबार,
बात-बात पर लड़ने-मरने को रहते हैं तैयार।।
हाथ में त्रिशूल हिन्दू के,
चाकू मुसलमां और सिख कटार
बहकावे में बन जाते हैं देश के गद्दार।।’’

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