Friday, 30 May 2014

                                                    मजबूत होगा अपना भारत
राष्ट्र के नवनिर्माण के लिए पूरे भारत की आसभरी निगाहें मोदी की ओर लगी हैं। अधिकांश लोग बिन मांगे मोदी को कार्यों की प्राथमिकता का परामर्श दे रहे हैं। मैं भी उन्हीं लोगों की सूची में शामिल हो रहा हूं।
भूमिका: देश-विदेश के जानेमाने राजनीतिज्ञ, अर्थशास्त्री, वैज्ञानिक, समाजशास्त्री तथा अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ मानते रहे हैं कि 1-प्राकृतिक संसाधनों भरपूर एवं वृहद संभावनाओं वाला देश है भारत, 2- भारत के लोगों में अपार योग्यता और क्षमता है।
अगर उक्त कथन सही हैं और उन्हें जमीन पर चरितार्थ करना है तो हमारा परामर्श होगा कि;
(1) जनता की गाढ़ी कमाई पर ऐश करने वाले जहरीले लोगों पर पूरी कठोरता से प्रतिबंध लगाओ। महलों, मठों और सरायों में सुख भोग करने वाले हिन्दू-मुसलमानों के स्वयंभू ठेकेदारों को नष्ट करो। जमाना नाराज होता है तो होने दो। कोई जाति या सम्प्रदाय के लोग नाराज होते हैं तो फिक्र मत करो। क्योंकि उक्त विषधरों की प्रजातियां, शताब्दी से भारत को उसकी वास्तविक शक्ति और पूर्ण क्षमता के साथ खड़ा नहीं होने दे रही हैं।
(2) जाति, सम्प्रदाय, भाषा और क्षेत्र की खेती बंद होते ही, नागफनी की खेती करने वाले या तो सुधरकर साकारात्मक विचारों के खेतीहर हो जाएंगे या अपने आप नष्ट हो जायेंगे।
ऐसा होते ही जनता, जाति, धर्म और सम्प्रदाय के घुटनभरे बाड़े से बाहर निकलकर अपनी वास्तविकता को जान सकेगी। हिन्दूस्तानी के रूप में अपनी सूरत को पहचान सकेगी। सब परस्पर मिलजुलकर अपनी पूरी क्षमता, योग्यता और कौशल के साथ जो कार्य करेंगे, उस नई ऊर्जा और नये विश्वास से बनेगा ‘एक नया भारत’, एक खुशहाल भारत, एक शक्तिशाली और समृद्ध भारत।
गुरूद्वारे में होगी देव की वाणी, मस्जिद में अजान, मंदिरों में तरंगित होगा रामायण का गान।
‘‘ न हिन्दू गद्दार है, न सिख-मुसलमां है गद्दार  बनाया  है  देश  को सबने,  सब  हैं  वफादार।।
पढ़े-लिखे जाहिल हों जैसे, परस्पर नहीं एतबार,
बात-बात पर लड़ने-मरने को रहते हैं तैयार।।
हाथ में त्रिशूल हिन्दू के,
चाकू मुसलमां और सिख कटार
बहकावे में बन जाते हैं देश के गद्दार।।’’

Thursday, 29 May 2014


मुनिया, दरवाजे पर नीम के पेड़ तक खरहरा (झाड़ू) लगा चुकी है। नमक-हरी मिर्च के खनुए तथा रात की बची दो-तीन रोटी लेकर धनई चाचा, खरमेटाव (ब्रेकफास्ट) कर चुके हैं। तीन-चार रोटियां मुनिया के लिए छोड़ देते हैं। नीम के पेड़ के नीचे बंधी बकरियों को घूमने के लिए छोड़ देते हैं। फिर वहीं पेड़ की छाया तले, सिरहाने लपेटकर अंगोछा, लेट जाते हैं। पहले दोपहरी, फिर शाम होती है।

बांदा (उत्तर प्रदेश) में दो नाबालिक लड़कियों के साथ करके दुराचार, नरपिशाचों ने पेड़ पर लटका दिया। सरकार कह रही है दोषियों को नही बख्शा जाएगा।

यह कैसा अंतर्नाद है ?
कहीं किसी नारी की कराह है,
बूढ़ा कान पहचानना चाह रहा था वह आवाज
लेकिन काया थी कमजोर, दे गयी जवाब।
बल देकर हड्डियों पर खड़ा होने वाला
वह जर्जर बूढ़ा है एक नौयवना का बाप।
ȡȡȡ
धनुषीय आकार में झुककर वहां जा रहा था,
खांस रहा था, रह-रहकर हांफ रहा था।
दिन था ढलने को, सो
बकरियों को खूंटे में बांध रहा था।
ȡȡȡ
कोने में गांव के पनघट था वीरान
मटकी भरने गयी थी मुनिया, रास्ता था सुनसान,
स्थान पर निर्जन, दुर्जन टहल रहे थे,
आती बाला को देखकर, मन में मचल रहे थे।
ȡȡȡ
पलक झपकते ही झाड़ियां हिल रही थीं
नीचे अपने हो रहे पापाचार पर कौंध रही थीं,
धंसाकर दांत भेड़िए उसे पंजे से नोच रहे थे
दूसरे वहीं खड़े अपने बारी की सोच रहे थे।



ȡȡȡ
करके असफल प्रतिरोध,
मुनिया हो गयी बेहोश लेकिन
आया नहीं अभी तक नर-भेड़ियों को होश
ȡȡȡ
असहाय सिसकियों में तड़पकर
बीती पूरी रात
कंगाली छिपे न जैसे

उघड़ गयी यह बात।

ȡȡȡ

बत्ती लाल-लश्कर लिए किया मंत्री ने दौरा
दुःख जताकर फौरन बोले,
अपराधी को नहीं जायेगा छोड़ा
एवज में इस घटना के हर्जाना मिलेगा आपको

सुनकर नेता जी के बोल, सांप सूंघ गया बाप को।
कोने में निःशब्द बैठा, पथराया सोच रहा था
प्रजातंत्र में प्रजा की भाषा बोल रहा था,

‘हर्जाना नहीं’ मर्दाना समाज दे दो बाबू
राज-काज का हो नरपिशाचों पर काबू
साहेब! नारी मान है सबसे बड़ा
दानों में कन्यादान है सबसे बड़ा
हमें धन नहीं बेटियों की सुरक्षा का संकल्प चाहिए
उनकी इज्जत-आबरू का नहीं कोई विकल्प चाहिए।।